हा हा ..................
अरे दोस्तों ब्लॉग छोड के कहाँ भाग रहे हो ...........................
रुको ..!!!!!!!!!!
समझो ...!!!!!!!!!!!!
देखो भाषा माँ की बोल बच्चे को पालने के लिए...तो मुझे कोई बैर नही ब्रिटिश अंग्रजी से ...सभी भाषाओं का में सम्मान करता हू ....हर भाषा के साथ उसकी संस्कृति भी जुडी होती है |
सो जब भारत गुलाम हुआ तो इस गुलामी को और पक्का करने के लिए लोर्ड मैकाले ने एक खेल खेला के यहाँ की संस्कृति को तहस नहस कर दो ..व् ये सिर्फ भाषा के माध्यम से ही हो सकता था ..सो उसने अंग्रेजी को बढ़ावा......... दिया व उन लोगो को आगे बढ़ाना शुरू किया जो अंग्रेजी जानते थे ...फिर क्या था भेढ़ चाल शुरू हो गयी ...एक को देख दूसरा इस अल्पविकसित भाषा में बोलने की होड करने लगा व धन कमाने लगा ...लोग अंग्रज जैसा दिखने में गर्व करने लगे ..पर ये वो समय था के वो दूर तक देख नही पाए ....जहाँ तक मैकाले ने सोचा था....तो मैकाले की चाल कामयाबी की रह पे चल पड़ी .....अंग्रेजी को लोगो ने विकास का नाम दे दिया ..यानि अंग्रेजी ही विकास है ...अंग्रेजी ही ज्ञान है ...भले ही आप अपनी भाषा में कितने ही ज्ञानी हो पर अंग्रेजी नही आती तो आप मूर्खो में गिने जाने लगे ....फिर इस भाषा के साथ इसकी संस्कृति भी चली आई ..उसे तो आना ही था...लोग अपना खान पान रहन सहन भूल के मूर्खो की तरह अंग्रेजो के पीछे ,उनकी संस्कृति (हा हा हा हा अंग्रजो की संस्कृति ) के पीछे भागने लगे ...
कपडे छोटे होने लगे ..............
भोग बढ़ने लगा ...................
दाढ़ी कट गयी.................
औरतो के बाल कट गए .............
भारतीय पर्यावरण के अनुकूल धोती छोटी हो गयी और पैंट सब पर चढ़ गया...........
हाथ में सिग्गी आ गयी ...
भारतीय सीता बैंगलोर के पब में जाने लगी ..............
ये सब तो जाने दो ..जो सबसे बड़ा नुक्सान हुआ वो देश के विज्ञानिक विकास का हुआ ..क्यू के हम माने बैठे थे के जो करेंगे अंग्रेज ही करेंगे ..क्यू के हमारी आधी उम्र तो इसके अतार्किक शब्दों को रटने में ही निकल जाती है ...सो हम विज्ञान को उनकी लिखी किताबो में पढते ही रह गए ...खोजने की कोई नयी कोशिश आज तक नहीं है...आज भी भारतीय कंपनिया विदेशो से तकनीक ले के पैसा छाप रही है ..किसी कंपनी में दो पैसे की नई खोज नही की जाती .....तो हमारी गुलाम मानसिकता से हम ब्रिटिश अंग्रजी में उलझे रहे व् पिछड़ते गए ....अब हल क्या है ....तो मूल में जाओ हम बर्बाद कहाँ से हुए थे ..अंग्रजी के भारत में प्रवेश से ...तो इसे भगाने से ही भारत बचेगा ...आज अंग्रेजी को यु ही भगाना आसान नही क्यू के मुर्ख इंडियन इसमें बड़ा गर्व महसूस करते है व् इस गर्व को तोड़ने के लिए हम सबको भारतीय अंग्रजी में काम करना होगा ....ऐसा करके कोई नै भाषा नही बनानी है न ही किसी का अपमान काना है बल्कि हमे सिर्फ अपने भारत के भटके लोगो को सत्य का दर्पण दिखाना है ....भाई हमारी इतनी परिष्कृत हिंदी भाषा है (आज उर्दू व अरबी फारसी से भरी हुई है ) व एक विज्ञानिक भाषा संस्कृत है ...हमारी प्रांतीय भाषाए भी त्रुटि मुक्त है .........
आप थोडा ध्यान से देखो अंग्रेजी का पहला शब्द :--
LANGUAGE hi galat hai ..isme 2 bar g aaya hai v pehli baar g se ga hua doosri baar ja hua ...kis tark se..hum bhartiyo ki aadat hai tark se samjhne ki nhi to chor dene ki......isis tarah aneko shabd hai jo wrong hai...to hume sirf ye karna hai ke galat shabdo ko korrekt karke istemaal karna hai ...jitna iska prachaar hoga utna hi angreji se moh kam hoga..v utna hi hindi v sanskrit me garv..
तो मिकाले ने कहा था के भाषा से ये देश गुलाम बनेगा ....योगी कहता है ...ब्रिटिश अंग्रेजी का बाजा बजाने से ...भारत जल्दी बनेगा ..अरे भाई यहाँ कोई मैडम थोड़ी ही मारेगी ..के................
kollej, nolej, skool, fyoocchar, naechar, kreashan, naeshan, akchual, thout,fout, bout, nou, kud, wud, jist, wach, iching, kiking, kulchar, languaje...likh diya ..........ye bhartiya angreji hai...v uddesya kisi ka apmaan nhi apna khoya hua swaaabhimaan jagaana hai ...ab aap Blog chor sakte ho...om shanti
अरे दोस्तों ब्लॉग छोड के कहाँ भाग रहे हो ...........................
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सो जब भारत गुलाम हुआ तो इस गुलामी को और पक्का करने के लिए लोर्ड मैकाले ने एक खेल खेला के यहाँ की संस्कृति को तहस नहस कर दो ..व् ये सिर्फ भाषा के माध्यम से ही हो सकता था ..सो उसने अंग्रेजी को बढ़ावा......... दिया व उन लोगो को आगे बढ़ाना शुरू किया जो अंग्रेजी जानते थे ...फिर क्या था भेढ़ चाल शुरू हो गयी ...एक को देख दूसरा इस अल्पविकसित भाषा में बोलने की होड करने लगा व धन कमाने लगा ...लोग अंग्रज जैसा दिखने में गर्व करने लगे ..पर ये वो समय था के वो दूर तक देख नही पाए ....जहाँ तक मैकाले ने सोचा था....तो मैकाले की चाल कामयाबी की रह पे चल पड़ी .....अंग्रेजी को लोगो ने विकास का नाम दे दिया ..यानि अंग्रेजी ही विकास है ...अंग्रेजी ही ज्ञान है ...भले ही आप अपनी भाषा में कितने ही ज्ञानी हो पर अंग्रेजी नही आती तो आप मूर्खो में गिने जाने लगे ....फिर इस भाषा के साथ इसकी संस्कृति भी चली आई ..उसे तो आना ही था...लोग अपना खान पान रहन सहन भूल के मूर्खो की तरह अंग्रेजो के पीछे ,उनकी संस्कृति (हा हा हा हा अंग्रजो की संस्कृति ) के पीछे भागने लगे ...
कपडे छोटे होने लगे ..............
भोग बढ़ने लगा ...................
दाढ़ी कट गयी.................
औरतो के बाल कट गए .............
भारतीय पर्यावरण के अनुकूल धोती छोटी हो गयी और पैंट सब पर चढ़ गया...........
हाथ में सिग्गी आ गयी ...
भारतीय सीता बैंगलोर के पब में जाने लगी ..............
ये सब तो जाने दो ..जो सबसे बड़ा नुक्सान हुआ वो देश के विज्ञानिक विकास का हुआ ..क्यू के हम माने बैठे थे के जो करेंगे अंग्रेज ही करेंगे ..क्यू के हमारी आधी उम्र तो इसके अतार्किक शब्दों को रटने में ही निकल जाती है ...सो हम विज्ञान को उनकी लिखी किताबो में पढते ही रह गए ...खोजने की कोई नयी कोशिश आज तक नहीं है...आज भी भारतीय कंपनिया विदेशो से तकनीक ले के पैसा छाप रही है ..किसी कंपनी में दो पैसे की नई खोज नही की जाती .....तो हमारी गुलाम मानसिकता से हम ब्रिटिश अंग्रजी में उलझे रहे व् पिछड़ते गए ....अब हल क्या है ....तो मूल में जाओ हम बर्बाद कहाँ से हुए थे ..अंग्रजी के भारत में प्रवेश से ...तो इसे भगाने से ही भारत बचेगा ...आज अंग्रेजी को यु ही भगाना आसान नही क्यू के मुर्ख इंडियन इसमें बड़ा गर्व महसूस करते है व् इस गर्व को तोड़ने के लिए हम सबको भारतीय अंग्रजी में काम करना होगा ....ऐसा करके कोई नै भाषा नही बनानी है न ही किसी का अपमान काना है बल्कि हमे सिर्फ अपने भारत के भटके लोगो को सत्य का दर्पण दिखाना है ....भाई हमारी इतनी परिष्कृत हिंदी भाषा है (आज उर्दू व अरबी फारसी से भरी हुई है ) व एक विज्ञानिक भाषा संस्कृत है ...हमारी प्रांतीय भाषाए भी त्रुटि मुक्त है .........
आप थोडा ध्यान से देखो अंग्रेजी का पहला शब्द :--
LANGUAGE hi galat hai ..isme 2 bar g aaya hai v pehli baar g se ga hua doosri baar ja hua ...kis tark se..hum bhartiyo ki aadat hai tark se samjhne ki nhi to chor dene ki......isis tarah aneko shabd hai jo wrong hai...to hume sirf ye karna hai ke galat shabdo ko korrekt karke istemaal karna hai ...jitna iska prachaar hoga utna hi angreji se moh kam hoga..v utna hi hindi v sanskrit me garv..
तो मिकाले ने कहा था के भाषा से ये देश गुलाम बनेगा ....योगी कहता है ...ब्रिटिश अंग्रेजी का बाजा बजाने से ...भारत जल्दी बनेगा ..अरे भाई यहाँ कोई मैडम थोड़ी ही मारेगी ..के................
kollej, nolej, skool, fyoocchar, naechar, kreashan, naeshan, akchual, thout,fout, bout, nou, kud, wud, jist, wach, iching, kiking, kulchar, languaje...likh diya ..........ye bhartiya angreji hai...v uddesya kisi ka apmaan nhi apna khoya hua swaaabhimaan jagaana hai ...ab aap Blog chor sakte ho...om shanti

vow....good work
ReplyDeleteBat guru pareshani bahut hui simit powar ki vajah se mere ko thoda aur power do kuchh dinon ke liye...... Taaki interface par bhi kaam kar sakun.
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteअग्रेजी भाषा के भ्रम और सही तथ्य =========================
ReplyDeleteभ्रम 1.) अंग्रेजी अं...तर्राष्ट्रीय भाषा है: दुनिया में इस समय 204 देश हैं और मात्र 12 देशों में अँग्रेजी बोली, पढ़ी और समझी जाती है। संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है।
इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी।
भ्रम 2.) अँग्रेजी नहीं होगी तो विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई नहीं हो सकती: दुनिया में 2 देश इसका उदाहरण हैं की बिना अँग्रेजी के भी विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई होटी है- जापान और फ़्रांस । पूरे जापान में इंजीन्यरिंग, मेडिकल के जीतने भी कॉलेज और विश्वविद्यालय हैं सबमें पढ़ाई "JAPANESE" में होती है, इसी तरह फ़्रांस में बचपन से लेकर उच्चशिक्षा तक सब फ्रेंच में पढ़ाया जाता है।
भ्रम 3.) अँग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है:: किसी भी भाषा की समृद्धि इस बात से तय होती है की उसमें कितने शब्द हैं और अँग्रेजी में सिर्फ 12,000 मूल शब्द हैं बाकी अँग्रेजी के सारे शब्द चोरी के हैं या तो लैटिन के, या तो फ्रेंच के, या तो ग्रीक के, या तो दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों की भाषाओं के हैं। उदाहरण: अँग्रेजी में चाचा, मामा, फूफा, ताऊ सब UNCLE चाची, ताई, मामी, बुआ सब AUNTY क्यूंकी अँग्रेजी भाषा में शब्द ही नहीं है। जबकि गुजराती में अकेले 40,000 मूल शब्द हैं। मराठी में 48000+ मूल शब्द हैं जबकि हिन्दी में 70000+ मूल शब्द हैं। कैसे माना जाए अँग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है ??
vichar uttan h ,kai any bhasha k sath ye prayog chal bhi raha h
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