दोस्तों शुरू में ये सोचा था के भारतीय अंग्रेजी उपयोग करते समय ब्रिटिश अंग्रेजी के त्रुटि वाले मूल शब्द कि सबसे बड़ी गलती को सुधर के भारतीय अंग्रेजी का शब्द बनाएंगे व् अपने इस अंग्रेजी से मोह तोड़ो अभियान को आगे बढायेंगे ..पर ..विचार आया है के इसमें इतनी त्रुटियाँ है के समर्थकों में मतभेद हो रहा है ..अतः आओ कुछ नियम बनाए व उनपे ही चलेंगे | ये हिंदी के स्वर व् व्यंजन के नियमों पे इसको पुनः परिभाषित करके उसी पे चलेंगे ; अर्थात -
अ = a,आ =aa....क= ka ,का =kaa
स्वर = अ आ इ ई उ ऊ ओ औ ए ऐ ऋ क ख ग घ ड च छ ज झ त थ द ध न ट ठ ड ढ य र ल व स श ष क्ष त्र ज्ञ
अब इनको अंग्रेजी में क्या शब्द देंगे मूल शब्द में-----
अ - a आ - aa इ i/e
ई - ee उ - u ऊ - oo
ओ - o औ - ao ए - ae
ऐ - ae ऋ - hri
क - ka ख - kha ग - gha
घ - gha ड - da च - cha
छ - cha ज - ja झ - jha
त - ta थ - tha द - da
ध - dha न - na ट - ta
ठ - tha ड - da ढ - dha
य - ya र - ra ल la
व - va श - sha ष sha
स - sa/ca
क्ष - ksha त्र - tra ज्ञ - gya
अब आई मात्राओं कि बारी
क - ka, का - kaa, कि - ki, की - kee, कु - ku, कू - koo, के - kae, कै - kae, को - ko, कौ - kao, कं - kan, कः - kah
in the saem maennar we will kreaet / refain adar words
aai = आई, my = mai
.....aai aem sorree for korrapting /refaining british english :D :D :D
मानो आपको नेशनल(national) को भारतीय अंग्रेजी में लिखना है -
nae ने + sh श + na ना + l ल
country=kantree college=kaollaej
knowledge=naollaej thought=thaot
creation=kreaeshan
तो अब शायद सुविधा होगी...........
मेकाले जी हम आपकी ब्रिटिश अंग्रेजी को लन्दन छोड़ने आ रहे है २०१४ में
.....साथ में आपकी संस्कृति भी दे जायेंगे व् भारत कि संस्कृति कि शुरुआत आपके यहाँ भी होगी .....
हम गुलाम नही भक्त बनाते है ..आत्मा को अपना बनाते है
..शरीर को तो ताकत से कोई भी गुलाम बना सकता है ...प्रेम व् अध्यात्म से हम आत्मा ही चुरा लेते है
....सारा जग एक कुटुंब है ..एक आत्मा के ६२००० हज़ार जन्म भी मान लो तो हम में से कई लोग उन अंग्रेजो कि आत्मा भी होंगे व हो सकता है हम लन्दन भी रह चुके हों
...दुनिया धन के पीछे भागती है व खुद को पढ़ना भूल जाती है भारत वो देश है जहाँ बहुत लोग खुद कि व परमात्मा कि पढ़ाई करते है व् जो ये करता है व ज्ञान ले लेता है उसके पीछे दुनिया भागती है ..क्यूँ के शांति आत्म ज्ञान में है परमात्मा के ज्ञान में है (इसीलिए सारे पढ़े लिखे, विज्ञानिक, डॉक्टर धनी, नेता सब बाबाओं के पीछे भागते है क्यूँ के वो खुद को नही पढते )
...तोऽऽऽ....... जल्द लन्दन भी खुद को पढ़ना सीखेगा हमारी संस्कृति से
